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नवग्रह जप उज्जैन

Complete ritual to with best pandit

2 से 4 घंटे (पूजा के प्रकार पर निर्भर)

नवग्रह जप उज्जैन

नवग्रह जप का महत्व भारतीय ज्योतिष और शास्त्रों में अत्यधिक बताया गया है। यह जप व्यक्ति के जीवन में ग्रह दोषों को शांति प्रदान करता है और जीवन में समृद्धि, शांति व संतुलन लाता है। उज्जैन, जो महाकालेश्वर की नगरी है, नवग्रह जप के लिए सबसे श्रेष्ठ स्थान माना जाता है।

शास्त्रीय संदर्भ:

  • नवग्रह स्तोत्र का उल्लेख वेदों, पुराणों और ब्रह्मांड पुराण में मिलता है।

  • नवग्रह जप को जीवन में ग्रह शांति का सर्वोत्तम उपाय माना गया है।

  • विशेषकर बृहस्पति, शनि और राहु-केतु के दोष शांत करने के लिए यह जप अत्यधिक फलदायी होता है।

लाभ और फायदे

  • जीवन से अशुभ प्रभाव और ग्रह पीड़ा का निवारण

  • करियर और व्यवसाय में सफलता की राह आसान बनना

  • दांपत्य जीवन और पारिवारिक संबंधों में सुधार

  • मानसिक शांति और तनाव में कमी

  • वित्तीय उन्नति और स्थिरता

  • शिक्षा और संतान से संबंधित बाधाओं का निवारण

पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान एवं शुद्धिकरण

  • नवग्रह देवताओं का आवाहन

  • प्रत्येक ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु) के लिए बीज मंत्रों का जप

  • 11,000 – 1,25,000 मंत्रों का उच्चारण (आवश्यकतानुसार)

  • पूजन सामग्री में दूध, दीपक, पुष्प, वस्त्र एवं नौ प्रकार के अनाज अर्पित करना

  • अंत में हवन एवं आशीर्वचन

अपेक्षित परिणाम

  • धीरे-धीरे जीवन में आने वाली बाधाओं का निवारण

  • करियर व शिक्षा में सफलता

  • ग्रह दोषों से राहत और मानसिक संतुलन

  • आर्थिक प्रगति एवं संतान सुख में वृद्धि

  • आध्यात्मिक विकास और आत्मबल की वृद्धि

त्वरित जानकारी

अवधि

4 से 6 घंटे

श्रेष्ठ समय

ग्रहण काल, अमावस्या, पूर्णिमा, प्रदोष काल, जन्मदिन/जन्मनक्षत्र या ज्योतिषाचार्य द्वारा बताए गए शुभ मुहूर्त

श्रेणी

ग्रह शांति पूजन / दोष निवारण

कौन करवाए

  • जिनकी जन्म कुंडली में ग्रह दोष अधिक हैं

  • बार-बार जीवन में बाधाएँ और असफलताएँ आ रही हों

  • विवाह, संतान, स्वास्थ्य या व्यवसाय में समस्या हो

  • शनि साढ़ेसाती, राहु-केतु महादशा या अशुभ ग्रह दशा का प्रभाव हो

पूजा के लिए निर्देश

  • पूजन के दिन उपवास या सात्त्विक भोजन करें

  • स्वच्छ एवं हल्के रंग के वस्त्र धारण करें (सफेद/पीला श्रेष्ठ)

  • पूजा के दौरान सकारात्मक और शांत मन रखें

  • 40 दिन तक नियमपूर्वक ग्रह स्तोत्र/मंत्र का जप करें

व्यक्तिगत सलाह चाहिए?

आचार्य डॉ. आशीष कुमार शर्मा से संपर्क करें

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