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चांडाल दोष पूजन उज्जैन

Complete ritual to with best pandit

2 से 4 घंटे (पूजा के प्रकार पर निर्भर)

चांडाल दोष क्या है?

चांडाल दोष तब बनता है जब गुरु ग्रह (बृहस्पति) राहु या केतु के साथ एक ही भाव में बैठता है। इस योग को ज्योतिष में अत्यंत अशुभ माना गया है। यह व्यक्ति की शिक्षा, वैवाहिक जीवन, करियर और समाज में प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है।

शास्त्रीय संदर्भ:

  • बृहत् पाराशर होरा शास्त्र और गरुड़ पुराण में इसका उल्लेख मिलता है।

  • इसे दूर करने के लिए विशेष पूजन और अनुष्ठान का महत्व बताया गया है।

लाभ और फायदे

  • शिक्षा और करियर में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं।

  • वैवाहिक जीवन और पारिवारिक संबंधों में सुधार आता है।

  • मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है।

  • आर्थिक स्थिरता और व्यापार में सफलता मिलती है।

पूजा विधि

  • प्रातः स्नान एवं शुद्धिकरण

  • गणपति एवं शिव पूजन

  • गुरु, राहु-केतु शांति मंत्रों का जाप (विशेष रूप से 108 अथवा 1008 बार)

  • विशेष हवन और आहुतियां

  • ताम्रपत्र, पीली वस्त्र, फल-फूल और गौ-दुग्ध से अर्पण

  • अंतिम आरती और आशीर्वाद प्राप्ति

अपेक्षित परिणाम

  • जीवन की प्रमुख बाधाएँ धीरे-धीरे समाप्त होती हैं।

  • उच्च शिक्षा एवं करियर में सफलता।

  • आत्मिक शांति और सकारात्मक सोच का विकास।

  • परिवार में सामंजस्य और आपसी संबंधों में सुधार।

  • दीर्घकालिक समृद्धि और स्थिरता।

त्वरित जानकारी

अवधि

3 से 5 घंटे 

श्रेष्ठ समय

गुरु पुष्य नक्षत्र, गुरुवार, ग्रहण काल पश्चात, या योग्य ज्योतिषाचार्य द्वारा बताए गए विशेष मुहूर्त में।

श्रेणी

दोष निवारण पूजन

कौन करवाए

  • जिनकी कुंडली में गुरु-राहु या गुरु-केतु का मेल है।

  • जिन्हें शिक्षा, करियर और विवाह में बार-बार रुकावटें आती हैं।

  • जो लोग लगातार मानसिक तनाव, आर्थिक संकट या समाज में अपयश का सामना कर रहे हैं।

पूजा के लिए निर्देश

  • पूजन के दिन व्रत रखें।

  • पीले या सफेद वस्त्र धारण करें।

  • सकारात्मक सोच और श्रद्धा बनाए रखें।

  • पूजन के बाद 41 दिनों तक विशेष अनुशासन और आचार-विचार का पालन करें।

व्यक्तिगत सलाह चाहिए?

आचार्य डॉ. आशीष कुमार शर्मा से संपर्क करें

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