ग्रहण दोष पूजन उज्जैन
Complete ritual to with best pandit
2 से 4 घंटे (पूजा के प्रकार पर निर्भर)
ग्रहण दोष क्या है?
ग्रहण दोष तब बनता है जब सूर्य या चंद्रमा ग्रहण के समय अशुभ योग में आ जाते हैं, विशेषकर जन्मकुंडली में राहु या केतु के साथ संयोजन या दृष्टि से। यह दोष व्यक्ति के जीवन में रुकावटें, स्वास्थ्य समस्याएँ और मानसिक अस्थिरता लाता है।
शास्त्रीय संदर्भ:
ब्रह्मांड पुराण, स्कंद पुराण और ज्योतिष ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि सूर्य-चंद्र ग्रहण काल में किया गया पूजन पापों का नाश करता है।
उज्जैन महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में किया गया ग्रहण दोष पूजन विशेष फलदायी माना जाता है।
लाभ और फायदे
स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्ति
मानसिक शांति और स्थिरता की प्राप्ति
विवाह और संतान संबंधी अड़चनें दूर होती हैं
करियर और बिज़नेस में उन्नति
नकारात्मक ग्रहों के दुष्प्रभाव कम होते हैं
परिवार में सामंजस्य और खुशहाली आती है
पूजा विधि
प्रातःकाल शुद्धिकरण और स्नान
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग या शिवलिंग के समक्ष संकल्प
सूर्य/चंद्र ग्रहण काल में विशेष मंत्र जाप (राहु-केतु शांति मंत्र)
दुग्ध, जल, पुष्प और विशेष द्रव्य अर्पित करना
पंडित द्वारा 108 या 1008 बार बीज मंत्र का उच्चारण
आह्वान, हवन और अंत में आरती
अपेक्षित परिणाम
जीवन की रुकावटें धीरे-धीरे समाप्त
सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास में वृद्धि
रोगों से राहत और लंबी आयु का आशीर्वाद
कार्यों में सफलता और शुभ फलों की प्राप्ति
ग्रहों की अनुकूलता बढ़ना
त्वरित जानकारी
अवधि
2.5–3 घंटे
श्रेष्ठ समय
सूर्य या चंद्र ग्रहण के दिन, अमावस्या, पूर्णिमा या ज्योतिषाचार्य द्वारा बताई गई शुभ तिथि
श्रेणी
दोष निवारण
कौन करवाए
जिनकी कुंडली में सूर्य या चंद्र ग्रहण दोष हो
बार-बार असफलताओं और रुकावटों का सामना करने वाले
जिनको स्वास्थ्य, संतान, या विवाह संबंधी समस्या हो
मानसिक तनाव और अवसाद से पीड़ित लोग
पूजा के लिए निर्देश
पूजा के दिन उपवास या फलाहार करें
शुद्ध और साफ वस्त्र (सफेद/पीले) पहनें
नकारात्मक विचारों से दूर रहें
अनुष्ठान के बाद 21–40 दिन तक नियम पालन करें (जैसे सत्य बोलना, सात्विक भोजन करना, शिव मंत्र का जाप करना)